UPI काम कैसे करता है?
UPI एक ऐसा सिस्टम है जो आपके बैंक खाते को एक आसान पते से जोड़ता है जैसे कि username@upi। जब आप किसी को पैसा भेजते हैं, तो आप या तो उनका UPI ID डालते है या उनका QR कोड स्कैन करते हैं।
अब तक जो नाम आपकी स्क्रीन पर दिखता था, वह कहाँ से आता था? कभी आपकी फोन बुक से, कभी उस QR कोड में लिखे नाम से और कभी उस व्यक्ति ने ऐप में जो नाम रखा हो उससे। यानी वह नाम हमेशा भरोसेमंद नहीं होता था। बस यही एक कमजोरी थी और ठग इसी का फायदा उठाते थे।
नया नियम क्या है?
जून 2026 से यह नियम लागू हो गया है कि जब भी आप किसी का QR कोड स्कैन करें या UPI ID डालकर पैसे भेजने की कोशिश करें, तो आपकी स्क्रीन पर वही नाम दिखेगा जो इस व्यक्ति के बैंक के रिकॉर्ड में दर्ज है।
यह नाम सीधे बैंक के मुख्य सिस्टम से आएगा। जिसे Core Banking System या CBS कहते हैं। कोई बीच में हेर फेर नहीं कर सकता है। न कोई फर्जी नाम चलेगा, न दुकान का काल्पनिक नाम, न कोई उपनाम। यह नियम PhonePe, GooglePay, Paytm BHIM सभी ऐप्स पर लागू होगा।
एक उदाहरण से समझते हैं
मान लीजिए कि आप एक किराना स्टोर पर गए। दुकानदार का नाम हैं "विकास यादव" और उनकी दुकान का नाम है "श्री बालाजी किराना स्टोर"।
• पहले जब आप QR कोड स्कैन करते थे तो जो नाम वो सेट करके रखते थे जैसे "श्री बालाजी किराना स्टोर" या फिर कुछ और नाम दिखाई देता था।
• लेकिन अब स्क्रीन पर सीधे उनका असली नाम "Vikas Yadav" दिखाई देगा जिस भी QR code में आप स्कैन करेंगे। अब अगर कोई ठग उसी दुकान का नाम लगाकर अपना QR कोड चिपका दे, तो स्कैन करने पर कोई अलग नाम आएगा और आप तुरंत समझ जाएंगे कि कुछ गड़बड़ है। और आप अलर्ट हो जगाएंगे।
यह बदलाव किसके लिए सबसे जरूरी है?
• आम ग्राहकों के लिए- अगर आप रोजाना UPI से पेट्रोल भरवाते है, सब्जी खरीदते हैं या ऑटो वाले को पैसा देते हैं, तो यह बदलाव आपके लिए हैं। अब पैसा भेजने से पहले एक नजर डालें कि क्या नाम सही है? अगर हां, तो भेजें। नहीं तो रुक जाएं
• बुजुर्ग और कम पढ़े लिखे लोगों के लिए- UPI ठगी का सबसे ज्यादा शिकार वही लोग होते हैं जो तकनीकी को पूरी तरह नहीं समझते। उनके लिए यह नाम वाला फीचर एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। घर में जो बुजुर्ग UPI इस्तेमाल करते है, उन्हें यह जरूर बताएं।
• छोटे दुकानदारों के लिए- अगर आपकी दुकान का नाम और बैंक खाते का नाम अलग-अलग हैं, तो ग्राहकों को पहले बता दें। वरना वे पेमेंट करने में हिचकिचाएंगे। थोड़ी सी जानकारी आगे देने से भरोसा बना रहेगा।
तो क्या अब UPI पूरी तरह सुरक्षित हो गया है?
यह सवाल मन में आना स्वाभाविक हैं। लेकिन सच यह है कि यह बदलाव एक बहुत जरूरी कदम हैं, लेकिन इकलौता कदम नहीं। डिजिटल ठगी के और भी तरीके है जैसे कि फर्जी कॉल,SMS लिंक, स्क्रीन शेयर करवाना। उनसे बचने के लिए अभी भी सतर्कता जरूरी है। लेकिन QR कोड वाली ठगी जो बहुत आम हो है थी, उस पर यह नियम एक मजबूत ताला लगाता है।
आपको अभी क्या करना चाहिए?
आपको कुछ छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना है। जैसे
• अपने UPI ऐप को अपडेट करें। क्योंकि पुराने वर्जन में यह फीचर नहीं देखेगा।
• हर बार पैसा भेजने से पहले स्क्रीन पर आने वाला नाम देखें। अगर नाम अनजान लगे या कुछ अटपटा लगे तो रुके और सामने वाले से पूछे कि यह नाम आपका ही है कि नहीं। नाम कन्फर्म होने के बाद ही पेमेंट करें।
• अपने घर-परिवार वालो को खासकर बड़े-बुजुर्गों को यह बात समझाए कि किसी भी अंजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही फोन में आए OTP को किसी दूसरे व्यक्ति को बताएं।
कहां से कहा तक पहुंचे हम
कुछ साल पहले तक लोग ATM की लंबी कतारों में खड़े रहते थे। आज UPI से पल भर में पैसा इधर से उधर हो जाते हैं। सिर्फ मई 2026 में देशभर में करीब 29.90 लाख करोड़ रुपए के UPI लेनदेन हुए। यह संख्य हर साल बढ़ रही हैं। जब पैसों का लेन देन इतने बड़े पैमाने पर डिजिटल हो गया गया है, तो सुरक्षा भी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए। NPCI का यह फैसला इसी सोच का नतीजा हैं।
तकनीक हमारी मदद के लिए है, लेकिन असली सुरक्षा हमारी अपनी सजगता में है। नया नियम एक अच्छा हथियार हैं, पर इसे इस्तेमाल करना हमारे ऊपर हैं। जब भी QR कोड स्कैन करें, बस एक पल रुककर नाम देख ले। इतनी सी आदत आपको बड़े नुकसान से बचा सकती हैं। डिजिटल इंडिया तभी मजबूत होगा जब हर एक नागरिक जागरूक होगा।


